Tuesday, August 17, 2010

न मिला..

ऐसा तो नहीं है की
फिर प्यार न मिला
हाँ चाहत थी जिसकी
वो यार न मिला
ये सपनो की दुनिया
तो अब भी चल रही है
हाँ ख्वाब कोई वैसा
यादगार न मिला
इतना क्या कम है की
दिल में बस गए
क्या हुआ जो रिश्तों का
तार न मिला
ये जीना भी कोई
क्या जीना है कोई
जो रह रह के दर्द
बार बार न मिला
अब ये भी मुकद्दर का
लिक्खा ही समझ लेंगे
जो शख्स मिला हमको
बफादार न मिला
हैरत की बात "दीप"
है ये कायरों की दुनिया
दुश्मन भी मिला हमको
तो दिलदार न मिला

5 comments:

  1. बहुत अच्छे दीप भाई ........

    राजेश सिंह
    मुंबई

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  2. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति।, बधाई।

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  3. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  4. bahut hi bhavuk kavita hai..
    ऐसा तो नहीं है की
    फिर प्यार न मिला
    हाँ चाहत थी जिसकी
    वो यार न मिला
    khas kar yah panktiya...
    bahut hi acche jajbat hai apke

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